नवंबर 12, 2008

रीत

"रीना जायसवाल"

रीतों को किसने मान दिया,
किसने दर्द पराया जाना.
ना को किसने पहचान दिया
किसने साथ को साथ है माना.

जागा जो है बरसो सोकर,
उसने किसीको क्या जाना.
को किसने दान दिया है,
किसने भेद काल का जाना.

बको सुख की चाह रही है,
जिसने मुझे पहचाना.
वादा कर जो भूले मुझको,
क्या खूब मुझे पहचाना.

गते जो भी भले-भले थे,
मैंने आज उन्हें भी जाना.
अब अपने कल की खातिर,
मुझे सबको है बिसराना.

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