फ़रवरी 20, 2025

मधुर यादे...


तस्वीरे धुन्धली होती गयी,

मधुर यादे भी कुछ भूलने लगे हम।

बस याद रहा तो बस साथ, 

स्नेहिल स्पर्श वाला मृदुल हाथ।


माँ का आशिष, बहनों का दुलार 

भाई का भरोसे वाला साथ।

सोनी के दरवाजे पर सजी वो बारात,

रात के तारो में सिमटी, दुल्हन वाली लिबास।


माँ -पापा के हाथो, कन्यादान का पुण्य,

बिदाई में आँखों का नम होना,

मामा-मामी का नसीहतों का सौगात देना,

साले-सालियो का रोना बिलखना,

धुन्धला सा पर यादो में रचा बसा जाता है,

सजीव यादे सब आज हो आते है।


शिवि का आना, खिलखिलाना,

कन्धो पे हो सवार, मुझे घोडा बनाना,

विशु का आना, सबको हर्षाना,

सजीव यादे सब आज हो आते है।

तस्वीरे धुन्धली होती गयी,

मधुर यादे भी कुछ भूलने लगे हम।

बस याद रहा तो बस साथ, 

स्नेहिल स्पर्श वाला मृदुल हाथ।

जनवरी 06, 2021

स्वर्ण वैवाहिक दिवस - २९ मई 2019

 कुछ धुंधला सा मैं स्वप्न बुनकर आया हूँ,

यादों के धुंधलके में धूमिल सा,

हास परिहास के बीच उलझे,

परस्पर सौहाद्र का अतुलनीय प्रेम,

अभिलाषाओं से पूरित कर,

अभिव्यक्ति से हो परिपूर्ण, मैं आया हूँ।

कुछ धुंधला सा  मैं स्वप्न बुनकर लाया हूँ....


 माँ, आपका आँचल सदैव,

हर्ष सबका द्विगुणित करता रहा,

कोमल हृदयस्पर्शी विचार सदा,

वात्सल्य से भरपूर रहा,

दृढ़ मनोबल की उस प्रतिमूर्ति को,

नमन करते, नतमस्तक हो आया हूँ।

कुछ धुंधला सा मैं स्वप्न बुनकर लाया हूँ...


हर तीज-त्योहार में रचा बसा,

अनुपम सुस्वाद का वो अमृतमयी अहसास,

क्षुधा प्रतिपल हरता रहा,

निर्झरी सी काव्य सरिता गतिमान सी,

चित्रपट पर भी उकेरी छवि अभिराम सी,

पाँचों इन्द्रियों को कर तृप्त मैं आया हूँ,

कुछ धुंधला सा मैं स्वप्न बुनकर लाया हूँ...


स्नेह बंधन की दृढ़ता,

मित्रवत तव प्रेम का गर्वोन्नमत शीश,

पापा जी, 

आपके अतुलनीय सम्मान का,

बन श्वेत कपोत मैं आया हूँ,

कुछ धुंधला सा में स्वप्न बुनकर लाया हूँ।


अमूल्य निधि आपके जीवन के,

अभिलाषा, संजय , अनुभूति व अभिषेक है,

जीवन पथ पर निरंतर हो गतिमान,

आप दोनों का मार्ग दर्शन विशेष है,

आपके अदृश्य स्वप्न को देने मूर्तता,

कुछ धुंधला सा मैं स्वप्न बुनकर लाया हूँ।


मामा-मामी, मौसी-मौसा सब,

एकाकार हो , जिस सरिता से पोषित हुए,

उस सरिता, उस नाना-नानी के

अपूरित विछोह से हो व्यथित,

आपके विशेष अनुकंपा से होने अनुग्रहित,

कुछ धुंधला सा मैं स्वप्न बुनकर लाया हूँ।


.......

जून 28, 2019

मैं आज बारिश में भीग गया

मैं आज बारिश में भीग गया

अल्हड़ सी बारिश ने,
करवट बदला करीने से,
बादलों के आगोश से निकल,
आ लगी मेरे सीने से,
तरबतर हो उठा मैं रोमांच से,
और,
और,
मैं आज बारिश में मैं भीग गया।।

रिमझिम बारिश की फुहारों ने,
खोल दी पुराने यादों की खिड़की,
कॉलेज के बीते दिनों को,
टीस करके, रिस करके,
एक छतरी में हम चार दोस्त,
और,
और,
मैं उस बारिश में मैं भीग गया।।

अब क्या लौटेगा वो दौर,
काले बादल की छतरी बनाये,
वही पुराने दोस्त मिलकर,
नाचेंगे, झुमेंगे, खिलखिलाकर कहेंगे,
अरे,
अरे,
मैं आज बारिश में भीग गया।।

फ़रवरी 13, 2015

तेरी ये दुआ काफी है

तरन्नुम - ए - उल्फ़ाए  बाबस्ता एक आरजू नाकाफी है ,
ज़िक्र - ए - अफ़साना दरो दार तारो तार नाकाफी है। 
उल्फ़ते इस दौर में हर शख्स है रहगुज़र ,
तेरे हर बात में बस यही एक बात नाकाफ़ी है। 
हम यूँ ही तुझसे आदाबे हसरत रखतें हैं ,
मेरी सब हसरतों से ऊपर तेरी ये दुआ काफी है। 

जनवरी 01, 2013

दिन, हफ्ते, महीने कुछ यूँ जवाँ हुए,
ज्यूँ, बाद इबादत के खुदा से रु-बरु हुए!
हमसफ़र, ये दौर ए मुहब्बत यूँ ही चलता रहे,
आने वाला हर पल नया साल बनके आता रहे.......

जनवरी 04, 2009

तुमने कब देखा था मुझको, क्या याद है तुमको।
जब मैंने देखा था तुमको या उससे भी पहले, क्या याद है तुमको।
मैं निश्चल निर्मल वहां से गुजरता था
शायद वर्षों से ............
जहाँ खड़ी तुम करती थी
इन्तेजार किसी का , क्या याद है तुमको

शायद तुम्ही ने पहली बार दी थी
बधाई नए साल की
और पूछी थी खैरियत
मुझसे मेरे हाल की
हंसकर की रह गया था मैं
जवाब मिला न था तब तुमको
आंखों में मेरी ढूंढा था तब
कुछ तुमने, क्या याद है तुमको....

चाय पर फ़िर बुलाया था एक दिन
घर में सबसे मुझे जो मिलाना था
चाह तुम्हारी यही थी शायद
की मुझे अपने नजदीक बुलाना था
तब मुझसे मिलना तुम्हे अच्छा लगता था
साथ मेरा भाता था तुमको
मेरे हँसे हंस देती थी तुम
मेरे से अपनी उदासी ,,,, क्या याद है तुमको...

तुमने तो था मुंझे देवता बनाया
पूजा मुंझे पर कुछ न बताया
साए की तरह साथ रहना चाहां
घुटकर अकेले भी कुछ न जताया
फ़िर हार कर स्वीकारा था तुमने
जो abhist था प्यारा तुमको
प्यार पाकर तुम्हारा मैं
हँसता था मैं वही कुटिल हँसी ,,, क्या याद है तुमको.....




दिसंबर 31, 2008

मंगलमय नववर्ष

सागरसम विस्तृण, आल्हादित सुमधुर हर्ष,

हर्षित, पुलकित, उत्साहित, उदित नवहृदयंगम उत्कर्ष।

उदित नवहृदयंगम उत्कर्ष, सह सुमधुर गीत स्पंद,

स्पंदित हृदय, कम्पित चेतन, हो मंगलमय नववर्ष।