तस्वीरे धुन्धली होती गयी,
मधुर यादे भी कुछ भूलने लगे हम।
बस याद रहा तो बस साथ,
स्नेहिल स्पर्श वाला मृदुल हाथ।
माँ का आशिष, बहनों का दुलार
भाई का भरोसे वाला साथ।
सोनी के दरवाजे पर सजी वो बारात,
रात के तारो में सिमटी, दुल्हन वाली लिबास।
माँ -पापा के हाथो, कन्यादान का पुण्य,
बिदाई में आँखों का नम होना,
मामा-मामी का नसीहतों का सौगात देना,
साले-सालियो का रोना बिलखना,
धुन्धला सा पर यादो में रचा बसा जाता है,
सजीव यादे सब आज हो आते है।
शिवि का आना, खिलखिलाना,
कन्धो पे हो सवार, मुझे घोडा बनाना,
विशु का आना, सबको हर्षाना,
सजीव यादे सब आज हो आते है।
तस्वीरे धुन्धली होती गयी,
मधुर यादे भी कुछ भूलने लगे हम।
बस याद रहा तो बस साथ,
स्नेहिल स्पर्श वाला मृदुल हाथ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें