मैं आज बारिश में भीग गया
अल्हड़ सी बारिश ने,
करवट बदला करीने से,
बादलों के आगोश से निकल,
आ लगी मेरे सीने से,
तरबतर हो उठा मैं रोमांच से,
और,
और,
मैं आज बारिश में मैं भीग गया।।
रिमझिम बारिश की फुहारों ने,
खोल दी पुराने यादों की खिड़की,
कॉलेज के बीते दिनों को,
टीस करके, रिस करके,
एक छतरी में हम चार दोस्त,
और,
और,
मैं उस बारिश में मैं भीग गया।।
अब क्या लौटेगा वो दौर,
काले बादल की छतरी बनाये,
वही पुराने दोस्त मिलकर,
नाचेंगे, झुमेंगे, खिलखिलाकर कहेंगे,
अरे,
अरे,
मैं आज बारिश में भीग गया।।
अल्हड़ सी बारिश ने,
करवट बदला करीने से,
बादलों के आगोश से निकल,
आ लगी मेरे सीने से,
तरबतर हो उठा मैं रोमांच से,
और,
और,
मैं आज बारिश में मैं भीग गया।।
रिमझिम बारिश की फुहारों ने,
खोल दी पुराने यादों की खिड़की,
कॉलेज के बीते दिनों को,
टीस करके, रिस करके,
एक छतरी में हम चार दोस्त,
और,
और,
मैं उस बारिश में मैं भीग गया।।
अब क्या लौटेगा वो दौर,
काले बादल की छतरी बनाये,
वही पुराने दोस्त मिलकर,
नाचेंगे, झुमेंगे, खिलखिलाकर कहेंगे,
अरे,
अरे,
मैं आज बारिश में भीग गया।।