नवंबर 13, 2008

कामना

"जया श्रीराव"

कामना है तुमसे .........

कोई भी गीत ना हो,
और तुम चाहो कुछ गुनगुनाना!
यादों के हंसीं ताजमहल में
बरबस ही हमें बुलाना,
श्री गणेश के क्रम में देखो,
गीत प्रेम के गाना।
रा प्रेम का लय प्रेम का
प्रेम के क्रम में हमें सजाना

यदि ऐसा न हो तो .........

रना अपनी मृदुल हंसीं में,
खुशी दो - चार मिलाके ।
अपनी पुरानी यादों को ,
सपनो में ही बुलाना । ।

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