स्मृति
नवंबर 13, 2008
अपेक्षा
प्र
थम
प्रहर की बन नव अस्मिता,
ति
मिर
तिरोहण की पहलगामी।
मा
नवता
की पहचान बने जो,
रा
हों
की विस्मृत अनुगामी।
य
श
का अविचल आँचल थामे,
क
ल्पित
भावो की संगामी।
वा
दों
का रचकर प्रगाढ़ समन्वय,
र
चना
स्व भवितव्य द्रुतगामी।
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